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शारदीय नवरात्रि 2021 के दूसरे दिन ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना और आरती

भारत, त्यौहारों का देश है। और नवरात्रि, 9 दिनों तक चलने वाला विश्व का एकमात्र त्यौहार है जिसे हर भारतीय एक धार्मिक अनुष्ठान की तरह पूरे हर्ष और उल्लास के साथ मनाता है। इस त्यौहार के दौरान हर दिन माता के किसी एक रूप का पूजन होता है।

दूसरा नवरात्र ब्रह्मचारिणी देवी का है। पूर्वजन्म में ब्रह्मचारिणी देवी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया।

कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया।

कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह तुम्हीं से संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं।

इस देवी की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्व सिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है।

इस देवी को समर्पित नवरात्र का यह दूसरा दिन सभी प्रकार से शुभ और अनिष्ट को दूर करने वाला है और श्रीराम अगरबत्ती और धूप अपने विभिन्न उत्पादों और उनकी सुगंधि से इस दिन को और भी शुभ बनाते हैं। तो, इन नवरात्रों में अपनी पूजा को और भी पावन बनाएं और पूरे घर को महकाएं प्रभुश्रीराम अगरबत्ती व धूप की अखंड ज्योत के साथ जो अपनी सुगंधी से माता को रिझाएगा और घर में सुख शांति लाएगा।

This Navratre bring home the pious fragrance of spirituality!

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