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Shardiya Navratri 2021 Day 1 : इस समय तक कर लें कलश स्थापना, यहां जानें शुभ मुहूर्त और मां शैलपुत्री की पूजा- विधि

भारत, त्यौहारों का देश है। और नवरात्रि, 9 दिनों तक चलने वाला विश्व का एकमात्र त्यौहार है जिसे हर भारतीय एक धार्मिक अनुष्ठान की तरह पूरे हर्ष और उल्लास के साथ मनाता है। इस त्यौहार के दौरान हर दिन माता के किसी एक रूप का पूजन होता है।

प्रतिपदा को, सबसे पहले जौ बोने के लिए एक पात्र लिया जाता है। प्रतिदिन नियमित रूप से जल पोषण से ये जौ लहलहाने लगते हैं जो हमारी निष्ठा और आस्था का प्रतीक होती है।

अब एक कलश तैयार करें। कलश पर स्वस्तिक बनाएं। कलश के गले में मौली बांधें। अब कलश को थोड़े गंगाजल और शुद्ध जल से पूरा भर दें। कलश में साबुत सुपारी, फूल और दूर्वा डालें। कलश में इत्र, पंचरत्न तथा सिक्का डालें। अब कलश में पांचों प्रकार के पत्ते डालें। कुछ पत्ते थोड़े बाहर दिखाई दें, इस प्रकार लगाएं। चारों तरफ पत्ते लगाकर ढक्कन लगा दें।

इस ढक्कन में अक्षत यानी साबुत चावल भर दें। नारियल तैयार करें। नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर मौली बांध दें। इस नारियल को कलश पर रखें। नारियल का मुंह आपकी तरफ होना चाहिए। अब यह कलश जौ उगाने के लिए तैयार किए गए पात्र के बीच में रख दें। अब देवी- देवताओं का आह्वान करते हुए प्रार्थना करें कि ‘हे समस्त देवी-देवता, आप सभी 9 दिन के लिए कृपया कलश में विराजमान हों।‘

आह्वान करने के बाद, ये मानते हुए कि शैलपुत्री माता सहित सभी देवतागण कलश में विराजमान हैं, कलश की पूजा करें। कलश को टीका करें, अक्षत चढ़ाएं, फूलमाला अर्पित करें, इत्र अर्पित करें, नैवेद्य यानी फल-मिठाई आदि अर्पित करें। घटस्थापना या कलश स्थापना के बाद देवी मां की चौकी स्थापित करें।

This Navratre bring home the pious fragrance of spirituality!

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