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Shardiya Navratri 2021 Day 9: नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की होती है पूजा

भारत, त्यौहारों का देश है। और नवरात्रि, 9 दिनों तक चलने वाला विश्व का एकमात्र त्यौहार है जिसे हर भारतीय एक धार्मिक अनुष्ठान की तरह पूरे हर्ष और उल्लास के साथ मनाता है। इस त्यौहार के दौरान हर दिन माता के किसी एक रूप का पूजन होता है।


नवरात्र के नौवें दिन दुर्गाजी के नौवें स्वरूप मां सिद्धदात्री की पूजा और अर्चना का विधान है। जैसा कि इनके नाम से ही स्पष्ट हो रहा है कि सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली देवी मां सिद्धदात्री हैं।

मां दुर्गा का नौवां रूप ‘मां सिद्धिदात्री’
नवरात्र के नौवें दिन दुर्गाजी के नौवें स्वरूप मां सिद्धदात्री की पूजा और अर्चना का विधान है। जैसा कि इनके नाम से ही स्पष्ट हो रहा है कि सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली देवी है मां सिद्धदात्री। ऐसा विश्वास है कि इनकी पूजा पूरे विधि विधान के साथ करने वाले उपासक की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इनके चार हाथ हैं और ये कमल पुष्प पर विराजमान हैं। वैसे इनका वाहन भी सिंह ही है। इनके दाहिनी ओर के नीचे वाले हाथ में चक्र है और ऊपर वाले हाथ में गदा है। बाईं ओर के नीचे वाले हाथ में कमल का फूल है और ऊपर वाले हाथ में शंख है। प्राचीन शास्त्रों में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, और वशित्व नामक आठ सिद्धियां बताई गई हैं। ये आठों सिद्धियां मां सिद्धिदात्री की पूजा और कृपा से प्राप्त की जा सकती हैं। हनुमान चालीसा में भी इन्हीं आठ सिद्धियों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि ‘अष्टसिद्धि नव निधि के दाता, अस वर दीन्ह जानकी माता’।


अत्यन्त प्राचीनकाल में भगवान महादेव ने भी इन्हीं देवी की कठिन तपस्या कर इनसे ये आठों सिद्धियां प्राप्त की थी और इन्हीं देवी की कृपा से ही महादेव की आधी देह देवी की हो गई थी और वे अर्धनारीश्वर कहलाए थे। नवरात्र के नौवें दिन इनकी पूजा के बाद ही नवरात्र का समापन माना जाता है। इसी दिन ही हिंदू परिवारों में कन्याओं का पूजन और उनके चरण धोकर उन्हें माता का प्रसाद हलवा, पूड़ी और उबले हुए चने खिलाकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है।


नवरात्रि की नवमी, मां की विदाई का दिन है। इस दिन प्रातः स्नान करने के बाद चैकी पर मां सिद्धिदात्री को स्थापित करें। इसके उपरांत मां को पुष्प अर्पित करें। अनार का फल चढ़ाएं, नैवेध चढ़ाएं। मिष्ठान, पंचामृत और घर में इस दिन बनने वाले पकवान का भोग लगाएं। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें, पाठ के बाद हवन जरूर करें, नवमी के दिन कन्या पूजन और भोजन का विशेष महत्व है। श्रीराम अगरबत्ती और धूप अपने विभिन्न उत्पादों और उनकी सुगंधि से इस दिन को और भी शुभ बनाते हैंै। इन नवरात्रों में प्रभुश्रीराम की अखंड ज्योत अगरबत्ती के साथ अपनी पूजा को और भी पावन बनाएं और पूरे घर को महकाएं।

This Navratre bring home the pious fragrance of spirituality!

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