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Mangalvar Vrat : मंगलवार को हनुमान जी का व्रत रखने से पहले जरूर जान लें ये बातें

Mangalvar Vrat : मंगलवार (Mangalvar) को हनुमान जी का व्रत (Hanuman ji ka Vrat) रखा जाता है। मंगलवार के दिन हनुमान जी का व्रत रखने से उनकी असीम कृपा प्राप्त होती है। ये व्रत सम्मान, आत्मबल, साहस और पुरुषार्थ को बढ़ाता है। संतान प्राप्ति के लिए भी मंगलवार का व्रत किया जाता है। इस व्रत के फलस्वरूप पापों को मुक्ति मिलती है। जो भी व्यक्ति मंगलवार का व्रत करता है उस पर हनुमान जी की कृपा रहती है और भूत-प्रेत आदि शक्तियों या उनका दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है।

मंगलवार का व्रत किसे करना चाहिए
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगलवार का व्रत उन व्यक्तियों को करना चाहिए, जिन व्यक्तियों की कुण्डली में मंगल पाप प्रभाव में हों या वह निर्बल होने के कारण अपने शुभ फल देने में असमर्थ हों, उन व्यक्तियों को यह व्रत अवश्य करना चाहिए। यह व्रत क्योकिं मंगल ग्रह की शान्ति के लिये किया जाता है। जिस व्यक्ति के स्वभाव में उग्रता हो, या हिंसात्मक प्रवृ्ति हो, उन व्यक्तियोम को अपने गुस्से को शांत करने के लिये , मंगलवार का व्रत करना मन को शांत करता है। लडके इस व्रत को बुद्धि और बल विकास के लिये कर सकते है। मंगलवार का व्रत करने सें व्यवसाय में भी सफलता मिलती है।

इस तरह से रखे मंगलवार का व्रत
अक्‍सर मंगलवार का व्रत की शुरूआरत शुल्‍क पक्ष के प्रथम मंगलवार से आरंभ करना चाहिए। लेकिन बहुत से लोग इसकी शुरूआत कभी भी कर देते है। मगंलवार के व्रत को सर्व सुख, रक्‍त विकार, राज्‍य सम्‍मान तथा पुत्र की प्र‍ाप्ति के लिए उत्तम माना गया है। इस व्रत को रखने वाले स्‍त्री या पुरूष को प्रात काल जल्‍दी उठकर स्‍नान आदि से मुक्‍त होकर भगवान सुर्य को पानी चढाऐ। उसके बाद पीपल या तुलसी के वृक्ष में भी चढाऐ। इस दिन लाल वस्‍त्र धारण करने चाहिए।

इसके बाद विधिपूर्वक भगवान हनुमानी जी की पूजा करनी चाहिए, इस दिन लाल रंग के फूलो से पूजा करनी चाहिए। पूजा करने के बाद व्रत कथा पढ़े या फिर किसी ओर से सुने। कथा सुनने के बाद मंगलवार व्रत कथा की आरती करे और हनुमानजी महाराज का नाम ले। इसके बाद व्रत करने वाले को दिन में एक बार गेहूँ और गुड़ का बना हुआ भोजन करे। यदि कोई इस व्रत का 21 सप्‍ताह तक करता है तो पवनपुत्र हनुमान उसकी सभी मनोकामनाए पूर्ण करता है।

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मगंलवार व्रत की कथा

एक गॉव में ब्राह्मण और उसकी पत्‍नी रहते थे, उनके कोई सन्‍तान नही होने के कारण दोनो बहुत दुखी रहते थे। वह ब्रह्मण रोज हनुमानजी की पूजा हेतु वन में जाता और पूजा के दौरान पुत्र प्राप्‍ति का वरदान मागंता था। और घर पर उसकी पत्‍नी पुत्र प्राप्‍ति के लिए प्रत्‍येक मंगलवार को व्रत रखती थी। वह हर मंगलवार को पूरे विध‍ि विधान से हनुमानजी का व्रत व पूजा करती और भोजन बनाकर पहले तो हनुमानजी को भोग लगाती और फिर दोनो ग्रहण करते थे। एक बार कोई ऐसा व्रत आ गया जिसके कारण वह भोजन न बना सकी और हनुमानजी को भोग नही लगा पायी। वह अपने मन में ऐसा प्रण करके सो गई कि अब अगले मंगलवार को हनुमान जी का भोग लगाकर अन्‍न ग्रहण करूगी। वह ब्रह्मणी 6 दिन तक भूखी प्‍यासी रहने के कारण उसे मूर्छा आ गई। तब हनुमानजी उसकी लगन और निष्‍ठावान भक्‍ती को देखकर प्रसन्‍न हो गये। उन्‍होने उसे दर्शन दिया और कहा मै तुमसे अति प्रसन्‍न हूँ। “मै तुम्‍हे एक सुन्‍दर बालक देता हूँ”, जो तेरी बहुत सेवा किया करेगा। हनुमानजी मंगलवार को बाल रूप में दर्शन देकर अन्‍तर्धान हो गए। वह ब्रह्मणी सुन्‍दर बालक पाकर अति प्रसन्‍न हुई, और उसका नाम मंगल रखा। कुछ दिनो के बाद ब्रह्मण वन से लौटकर आया। तो उसने उस बालक को घर के आगंन में क्रीडा करते देखकर ब्रह्मणी से पूछा “यह बालक कौन है?” तब पत्‍नी ने कहा की हनुमानजी महाराज मगंलवार के व्रत से प्रसन्‍न होकर मुझे वरदान के रूप में यह बालक दिया है। ब्रह्मण अपनी पत्‍नी की बात सुनकर सोचा की यह बात छल से भरी जान उसने सोचा यह कुल्‍टा व्‍याभिचारिणी अपनी कलुषता छुपाने के लिए बात बना रही है।

एक दिन पति कुऍं पर पानी भरने के लिए जार रहा था, तब ब्रह्मणी बाेली की मंगल को भी अपने साथ ले जाओ। वह ब्रह्मण मंगल को अपने साथ ले गया और उसे कुऍ में डालकर स्‍वमं पानी भरकर घर आया, तो पत्‍नी ने पूछा कि मंगल कहा है। तब पीछे देखा तो मंगल मुस्‍कुराता हुआ घर आ रहा था, उसको देखकर ब्रह्मण आश्‍चर्य चकित रह गया। जब रात्रि में ब्रह्मण सोया हुआ था हनुमानजी उसके स्‍वप्‍न में आकर बोले की यह बालकर मैन दिया है। तुम अपनी पत्‍नी को कुल्‍टा और भुरा भला मत कहा। पति यह जानकर बहुत ही प्रसन्‍न हुआ और वह अपनी पत्‍नी के साथ प्रत्‍येक मंगलवार का व्रत करने लगा। और अपने जीवन को आन्‍नदपूर्वक व्‍यतीत करने लगा। जो मनुष्‍य मंगलवार व्रत कथा (Mangalwar Vrat Katha) को पढ़ता है या सुनता है और पूरे नियमो से व्रत रखता है। उसके हनुमान जी की कृपा से सभी कष्‍ट दूर हो जाते है। उसे सर्व सुख प्राप्‍त होते है!

मंगलवार व्रत महत्व
प्रत्येक व्रत का अलग-अलग महत्व और फल हैं, व्रत करने से व्यक्ति अपने आराध्य देवी- देवताओं को प्रसन्न करने में सफल होता है, और साथ ही उसे सुख-शान्ति की प्राप्ति भी होती है। इस व्रत को करने से धन, पति, असाध्य रोगों से मुक्ति आदि के लिये भी किया जाता है। वास्तव में इस मोह रुपी संसार से मुक्ति प्राप्ति के लिये भी व्रत किये जाते है। मंगल अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में जन्म लग्न में स्थित होकर पीडित अवस्था में हों, तो इस व्रत को विशेष रुप से करना चाहीए। जिन व्यक्तियों की कुण्डली में मंगल की महादशा, प्रत्यन्तर दशा आदि गोचर में अनिष्टकारी हो तो, मंगल ग्रह की शात्नि के लिये उसे मंगलवार का व्रत करना चाहिए। मंगलवार का व्रत इसीलिये अति उतम कहा गया है। श्री हनुमान जी की उपासना करने से वाचिक, मानसिक व अन्य सभी पापों से मुक्ति मिलती है। तथा उपवासक को सुख, धन और यश लाभ प्राप्त होता है।

हनुमान जी को गेंदे के फूल बहुत पसंद हैं। आप हनुमान जी को चरणों में गुलाब का फूल भी अर्पित कर सकते हैं। सिंदूर- हनुमान जी को सिंदूर अति प्रिय है। मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर अर्पित किया जाता है।

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