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Budhwar Vrat: बुधवार व्रत कथा एवं पूजा विधि

बुध को बुद्धि का कारण माना गया है जो कि एक महत्वपूर्ण ग्रह भी है। अगर किसी की कुण्डली में बुध खराब हो तो उसके जीवन में कभी भी तरक्की नहीं होती है साथ ही उसे कभी भी कामयाबी नहीं मिलती है। बुध को व्यापार और बहन, बेटी का कारक भी माना जाता है। इस दिन भगवान गणेश का दिन होता है। जो की वृद्धि के देवता माने जाते हैं। जो अपने भक्तो के सभी विघ्न बाधाओं को हरण कर लेते है। इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है ।

अगर कोई इनका सच्चे मन से पूजन करें तो उनको जीवन के में धन और सुख-समृद्धि की कभी कमीं नहीं रहती।भगवान गणेश जिन्हें विघ्न हर्ता भी कहा जाता है। उनकी पूजा -अर्चना करने से जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं। इस दिन व्रत रखने का भी विधान है। अगर कोई इस दिन सच्चे मन से गणेश जी की आराधना करता है, तो उसके जीवन के में धन और सुख-समृद्धि की कभी कमीं नहीं रहती।

बुधवार व्रत की विधि:

  1. व्रत वाले दिन सुबह उठकर स्नान आदि कार्यों से निवृत्त होकर सबसे पहले आप भगवान के प्रतिमा के आगे बैठें।
  2. गणेश जी की पूजा करने से पहले संकल्प लें क्योंकि किसी भी पूजा को शुरु करने से पहले संकल्प लेना आवश्यक है।
  3. सबसे पहले एक चौकी लेकर उस पर लाल कपड़ा बिछांए। इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
  4. कुमकुम,अक्षत , घी और अगरबत्ती से गणेश जी का पूजन करें।
  5. इसके बाद “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करें

बुधवार व्रत में रखी जानें वाली सावधानियां:

  1. गणेश जी की पूजा में तुलसी का प्रयोग न करें।
  2. गणेश जी की पूजा में टूटे और गीले चावल का प्रयोग न करें नहीं तो आपको गणेश जी के क्रोध का सामना करना पड़ेगा।

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बुधवार व्रत कथा (Budhwar Vrat Katha):

पौराणिक ग्रंथों में बुधवार के व्रत की कथा कुछ इस प्रकार है। बहुत समय पहले की बात है कि एक साहूकार का नया-नया विवाह हुआ था। उसकी पत्नी मायके गयी हुई थी। नया-नया विवाह था, नई-नई उमंग थी साहूकार का परिवार भी कुछ खास बड़ा नहीं था, जो रिश्तेदार थे उनके घर बहुत दूर थे। अब साहूकार को अकेलापन खाये जा रहा था। उससे रहा न गया और साहूकार जा पंहुचा ससुराल। साहूकार की बड़ी आवभगत हुई लेकिन ससुराल में तो अपनी पत्नी से खुलकर बात करना दूर सूरत देखना तक मुश्किल हो रहा था। अगले ही दिन साहूकार ने कह दिया कि विदाई की तैयारी कर लीजिये हमें निकलना हैं। अब संयोगवश वह दिन था बुधवार का, सास-ससुर ने समझाने का प्रयास किया कि बेटा आज बुधवार का दिन है इस दिन बेटी की विदाई नहीं करने का रिवाज़ है। बिटाई की विदाई क्या किसी भी शुभ कार्य के लिये यात्रा पर जाना बुधवार के दिन शुभ नहीं माना जाता। लेकिन साहूकार नहीं माना और कहा मैं इन सब बातों को नहीं मानता आप हमें जाने का आशीर्वाद दीजिये। अब अपने दामाद के आगे सास-ससुर की कहां चलने वाली थी, मन मसोसकर तैयारी करनी पड़ी। बेटी की विदाई कर दी गई। अब चलते-चलते रस्ते में साहूकार की पत्नी को प्यास लग जाती है। साहूकार जैसे पानी लेने के लिये जाता है तो वापस आते ही उसकी हैरानी का कोई ठिकाना नहीं रहता। अपने ही हमशक्ल को गाड़ी में पत्नी की बगल में बैठे देखता है। उसकी पत्नी भी एक शक्ल के दो-दो व्यक्तियों को देखकर परेशानी में पड़ गई कि उसका पति कौनसा है। जैसे ही साहूकार ने पत्नी के पास बैठे व्यक्ति से पूछा कि वह कौन है तो पलट कर जवाब दिया कि भैया मैं तो फलां नगर का साहूकार हूं और फलां नगर से अपनी पत्नी को लेकर आ रहा हूं तुम बताओ तुम कौन हो जो मेरा वेश धर कर यहां आ कबाब में हड्डी बनने के लिये आ धमके हो। ऐसे बहस बाजी करते-करते दोनों में झगड़ा बढ़ गया। झगड़े को देखते हुए राज्य के सिपाही वहां आ पंहुचे और साहूकार को पकड़ लिया। अब सिपाही भी चक्कर में कि दोनों की शक्ल तो एक समान है। उन्होंने साहूकार की पत्नी से पूछा कि उसका पति इनमें से कौनसा है वह बेचारी क्या जवाब देती। तब साहूकार ने हाथ जोड़ लिये और भगवान से विनती करने लगा कि हे भगवन यह आपकी क्या माया है। तभी आकाशवाणी हुई कि मूर्ख याद कर कुछ देर पहले ही तूने अपने सास-ससुर की आज्ञा न मानकर भगवान बुध का अपमान किया और बुधवार के दिन तू अपनी पत्नी को लेकर चल पड़ा जबकि तुझे इस दिन गमन नहीं करना चाहिये था। यह स्वयं बुध देव हैं जो तुम्हें सबक सिखाने के लिये तुम्हारे वेश में हैं। तब साहूकार ने कान पकड़ कर माफी मांगी और आगे से कभी भी ऐसा न करने का वचन किया और बुधवार को नियमपूर्वक व्रत पालन करने का संकल्प किया। तब जाकर साहूकार के रूप में प्रकट हुए बुध देवता अंतर्ध्यान हुए और साहूकार अपनी पत्नी को लेकर घर जा सका। इस घटना के पश्चात साहूकार और उसकी पत्नी दोनों नियमित रूप से बुधवार का व्रत पालन करने लगे।

मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस कथा को कहता है या सुनता है या फिर पढ़ता है उसे बुधवार के दिन यात्रा करने से किसी तरह का दोष नहीं लगता और समस्त सुखों की प्राप्ति होती है। बुध ग्रह की शांति और सर्व-सुख के इच्छुक स्त्री-पुरुष बुधवार के इस व्रत कर सकते हैं। ज्ञान, बुद्धि, कार्य, व्यापार आदि में उन्नति के लिये भी बुधवार का व्रत बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। बुधवार के दिन बुद्ध देवता के साथ-साथ भगवान गणेश जी की पूजा का विधान भी है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विघ्न विनाशक गणेश जी को लाल रंग बहुत प्रिय है। ऐसे में आप उनको लाल रंग के फूल चढ़ा सकते हैं। उनकी पूजा में आपको गुड़हल, लाल गुलाब का फूल अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा आप उनको गेंदे का फूल भी अर्पित कर सकते हैं।

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